07 OCT 2025
न्यूज़ नगरी
रिपोर्टर-काजल
हिसार-बच्चों को अगर खिलौने न मिलें तो थोड़ी देर रोते हैं, लेकिन अगर संस्कार न मिलें तो पूरा जीवन रोएंगे। संपत्ति न मिले तो कोई बात नहीं, पर संस्कार मिलना जरूरी है। ऐसे ही युवावस्था में धर्म का ध्यान करना उतना ही जरूरी है जितना भविष्य के लिए धन कमाना। जैसे युवावस्था में कमाया गया धन बुढ़ापे में काम आता है, वैसे ही युवावस्था में अर्जित धर्म और संस्कार भी जीवनभर साथ देते हैं। ये बातें महाराजा अग्रसेन भवन हिसार में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्रीमद्भागवत भास्कर गादिपति 108 गुरुजी सुधाकर महाराज (रंग महल धाम, हरिद्वार व मंगल धाम सिक्कम वाले) ने कही। ये कथा राजेंद्र सिंगला दिनौदा वाले और समस्त सिंगला परिवार की तरफ से आयोजित की गई है।
इस मौके पर सुधाकर महाराज ने कहा कि राष्ट्र की मजबूती संस्कारों से होती है, और आज के समय में युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ना सबसे आवश्यक कार्य है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी लोग अब भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जबकि भारत का कुछ वर्ग पश्चिमी संस्कृति की ओर भाग रहा है, जो गलत दिशा है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि युवाओं के लिए भी उतनी ही आवश्यक है। संगीत, भजन और झांकियों के माध्यम से कथा में युवाओं की भागीदारी बढ़ती है और परिवार एक सूत्र में बंधते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल विवाह, जन्मदिन या अन्य आयोजनों में परिवार कुछ घंटों के लिए ही एकत्रित होता है, लेकिन श्रीमद्भागवत कथा में सात दिनों तक सभी साथ रहते हैं, जिससे पारिवारिक एकता और भक्ति दोनों का अनुभव होता है। राजेंद्र सिंगला और उनके परिवार ने भी इसी सोच के साथ ये भागवत कथा करवाई है।
सुधाकर जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म सबके सुख की कामना करता है। इसमें हिंसा का नहीं, बल्कि प्रेम और सहअस्तित्व का संदेश है। जैसे सूर्य, चंद्रमा और वृक्ष सभी के लिए समान रूप से आवश्यक हैं, वैसे ही विश्व शांति के लिए सनातन धर्म की भावना जरूरी है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भगवान के स्वरूप को दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा और पवित्रता के साथ अपने पास रखना चाहिए और भगवान की पवित्रता का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। भजनों में फिल्मी धुनों के प्रयोग पर उन्होंने कहा कि फिल्मी धुनों पर भजन गाए जा सकते हैं, लेकिन वे अश्लील गीतों की धुनों पर नहीं होने चाहिए।
महाराज ने यह भी कहा कि माता-पिता को सबसे पहले अपने आचरण में सुधार लाना होगा, तभी बच्चों में संस्कार आएंगे। बच्चों को जीवन के लिए भगवान का धन्यवाद करना सिखाना चाहिए। परिवार संरचना पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि एक संतान की प्रवृत्ति सही नहीं है; परिवार में दो या तीन बच्चे होने चाहिए ताकि बच्चे एक-दूसरे के साथ खेलें, अपने सुखदुख साझा करें, इससे वो मोबाइल से भी दूर रहेंगे।
उन्होंने बताया कि यह कथा हिसार में उनकी पहली कथा है और यहां उन्हें अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 3 अक्टूबर से आरंभ हुआ है और 9 अक्टूबर तक चलेगा।
आयोजक राजेन्द्र सिंगला (दिनौदा वाले) ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 6 बजे तक महाराजा अग्रसेन भवन में आयोजित की जा रही है।

