08 OCT 2025
न्यूज़ नगरी
रिपोर्टर-काजल
हिसार-उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन हेतु कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा सीआरएम एप से किसानों द्वारा मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल के माध्यम से दर्ज धान की फसल की ऑनलाइन वेरिफिकेशन की जाएगी। इसके लिए ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर टीमों का गठन किया गया है जिसमें कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों, गांव के पटवारी, ग्राम सचिव, राजस्व व पंचायत विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। धान की फसल की कटाई उपरांत फसल अवशेष के इन-सीटू व एक्स-सीटू प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार द्वारा 1200 रुपए सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी।
उपायुक्त अनीश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित सीआरएम एप प्रशिक्षण हेतु एक बैठक का आयोजन भी किया गया। उपायुक्त ने कहा कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। उपायुक्त ने कहा कि सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए है। इसी कड़ी में फसल अवशेष प्रबंधन को प्रभावी बनाने हेतु सीआरएम नामक एप को लांच किया गया है।
उन्होंने निर्देश दिए कि गठित टीमें गांव-गांव जाकर किसानों द्वारा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज पंजीकरण के अनुसार धान फसल की वेरिफिकेशन करें। उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी क्षेत्र में पराली जलाने की घटना पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निगरानी टीमें नियमित रूप से क्षेत्रीय दौरे करें और अपनी रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करें ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दर पर आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराई जा रही है, जिनमें हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर, बेलर आदि प्रमुख हैं। उपायुक्त ने कहा कि इन मशीनों का अधिकतम उपयोग करके किसान पराली को जलाने की बजाय इसे खाद, चारे या ऊर्जा उत्पादन के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
सहायक कृषि अभियंता गोपीराम सांगवान ने सीआरएम एप के संचालन बारे पूरी जानकारी उपस्थित अधिकारियों/कर्मचारियों को दी। उन्होंने बताया कि इस ऐप के माध्यम से न केवल धान की फसल की वेरिफिकेशन की जाएगी बल्कि फसल अवशेष जलाने से संबंधित घटना भी ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है। इस एप पर किसान द्वारा एमएफएमबी पोर्टल पर दर्ज बोई गई धान की फसल की पूर्ण जानकारी उपलब्ध है। गठित टीमों को खेत में जाकर फसल अवशेष प्रबंधन के प्रकार की जानकारी वेरीफाई करनी होगी।
बैठक के दौरान हिसार एसडीएम ज्योति मित्तल, हांसी एसडीएम राजेश खोथ, नारनौंद एसडीएम विकास यादव, बरवाला एसडीएम डॉ वेदप्रकाश बेनीवाल, उप कृषि निदेशक राजवीर सिंह सहित संबंधित विभागों एवं टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।

