18 NOV 2025
न्यूज़ नगरी
रिपोर्टर-काजल
हिसार-मौहल्ला रामपुरा स्थित गीता भवन मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए वृंदावन धाम से आये कथा व्यास संत गोपीराम महाराज ने कहा कि जहां दिन आता है, वहां रात भी आती है। सुख में फूलना नहीं चाहिये और दुख में घबराना नहीं चाहिये। उन्होंने कहा कि हमें सत्संग करना चाहिये। कैकेयी का कुसंग मंथरा से हुआ तो दुल्हन की तरह सजी हुई अयोध्या श्मशान की तरह हो गई। मंथरा के कुसंग से निर्दोष राम को वन में भेजा गया लेकिन राम के मन में जरा सा भी दुख नहीं हुआ। भगवान राम से यही शिक्षा मिलती है कि जब राम को राज्य मिल रहा था तो उन्हें खुशी नहीं हुई और रातोंरात जब उन्हें वन जाने की आज्ञा हुई तब उन्होंने दुख भी नहीं किया। लक्ष्मण, सीता के साथ अयोध्या वासी भी वन को गए। अयोध्या वासियों का कहना था कि जहां राम होंगे वही अयोध्या है। राम से पहले जितने भी अयोध्या के राजा थे, किसी का नाम ग्रंथों में नहीं है। दशरथ का नाम इसलिए है कि वे राम के पिता थे। उन्होंने कहा कि राम को राम बनाने वाली कैकेयी है। उसने अपने नाम का भी त्याग कर दिया। जिस भरत को उसने जन्म दिया, उसने 14 सालों तक मां को मां नहीं कहा। लोगों ने भी लांक्षण लगाए लेकिन उसने किसी की परवाह नहीं की और राम को चमकाने के लिए वन में भेज दिया और स्वयं अपयश सहती रही। मंच संचालन करते हुए भजन गायक सुमित मित्तल ने भजनों की वर्षा की। बड़ी संख्या में कथा में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इससे पहले गीता भवन मंदिर में पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने संत गोपीराम महाराज का फूलमालाओं से स्वागत किया। नरेश बंसल, भूना वाले ने बताया कि 21 नवम्बर तक रोजाना दोपहर बाद 2:30 बजे से 6:30 बजे तक श्रीराम कथा में संत गोपीराम महाराज प्रवचन देंगे। 22 नवम्बर को प्रात: 9 बजे से 11 बजे तक प्रवचनों के साथ कथा को विश्राम दिया जाएगा। इसके बाद 11:30 बजे हवन होगा तत्पश्चात 12 बजे भंडारा चलाया जाएगा।

